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पेशाब में संकà¥à¤°à¤®à¤£ कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ होता है? जानें इसके कारण और इलाज
पेशाब में संकà¥à¤°à¤®à¤£ (यूटीआई, UTI) की समसà¥à¤¯à¤¾ तब होती है जब बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾, कवक या फिर वायरस यूरिन से होते हà¥à¤ बà¥à¤²à¥ˆà¤¡à¤° में पहà¥à¤‚च जाता है। पेशाब में संकà¥à¤°à¤®à¤£ की समसà¥à¤¯à¤¾ से 60 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ महिलाà¤à¤‚ और 12 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ पà¥à¤°à¥à¤· पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ होते हैं। पेशाब में संकà¥à¤°à¤®à¤£ की समसà¥à¤¯à¤¾ से पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ की अपेकà¥à¤·à¤¾ महिलाà¤à¤‚ अधिक पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ होती हैं। यानी कà¥à¤› पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ और महिलाओं को अपने जीवनकाल में à¤à¤• से दो बार पेशाब के संकà¥à¤°à¤®à¤£ की समसà¥à¤¯à¤¾ हो सकती है।
पेशाब में संकà¥à¤°à¤®à¤£ को à¤à¤¸à¥‡ समà¤à¥‡à¤‚
पेशाब में संकà¥à¤°à¤®à¤£ की समसà¥à¤¯à¤¾ के कारण यूरीनरी सिसà¥à¤Ÿà¤® जैसे कि किडनी, बà¥à¤²à¥ˆà¤¡à¤° और यà¥à¤°à¥‡à¤¥à¥à¤°à¤¾ आदि में इंफेकà¥à¤¶à¤¨ का खतरा रहता है। जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° इंफेकà¥à¤¶à¤¨ लोअर यूरिनरी टà¥à¤°à¥‡à¤•à¥à¤Ÿ में होते हैं। महिलाओं या पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ में पेशाब में संकà¥à¤°à¤®à¤£ का अगर सही समय पर इलाज नहीं कराया गया तो किडनी पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ होने का खतरा रहता है। अगर आपको पेशाब में संकà¥à¤°à¤®à¤£ के बारे में जानकारी नहीं है तो ये आरà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ल जरूर पढ़ें।
पेशाब में संकà¥à¤°à¤®à¤£ के लकà¥à¤·à¤£ कà¥à¤¯à¤¾ हैं ?
पेशाब में संकà¥à¤°à¤®à¤£ के कारण इस बात पर निरà¥à¤à¤° करते हैं कि यà¥à¤°à¥€à¤¨à¤°à¥€ टà¥à¤°à¥‡à¤• में कौन सा पारà¥à¤Ÿ इंफेकà¥à¤Ÿà¥‡à¤¡ हà¥à¤† है। पेशाब में संकà¥à¤°à¤®à¤£ के लकà¥à¤·à¤£ निमà¥à¤¨ पà¥à¤°à¤•ार हैं,
हाॅरà¥à¤®à¥‹à¤¨à¤² असंतà¥à¤²à¤¨ आपके शरीर और यहां तक कि मूड के लिठगंà¤à¥€à¤° सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ पैदा कर सकता है!
डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥‹à¤‚ से सरà¥à¤µà¥‹à¤¤à¥à¤¤à¤® उपचार और टिपà¥à¤¸ जानने के लिठनिःशà¥à¤²à¥à¤• साइन अप करें
मै टरà¥à¤®à¥à¤¸ और कंडीशनà¥à¤¸ से सहमत हू
पेशाब के दौरान जलन महसूस होना
अधिक मातà¥à¤°à¤¾ में पेशाब होना।
पेशाब बार-बार लगना
कà¥à¤²à¤¾à¤‰à¤¡à¥€ यूरिन।
यूरिन के रंग में बदलाव आ जाना।
यूरिन पास करने के दौरान अधिक बदबू महसूस होना।
महिलाओं में पेलà¥à¤µà¤¿à¤• पेन महसूस होना।
पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ में रैकà¥à¤Ÿà¤² पेन महसूस होना।
यूरिन में रकà¥à¤¤ के कण दिखाई देना
किडनी में संकà¥à¤°à¤®à¤£ होना
पेशाब में संकà¥à¤°à¤®à¤£ के दौरान दिख सकते हैं ये लकà¥à¤·à¤£
यूरिनरी टà¥à¤°à¥‡à¤•à¥à¤Ÿ के पारà¥à¤Ÿ किडनी, बà¥à¤²à¥ˆà¤¡à¤° और यूरेथà¥à¤°à¤¾ में इंफेकà¥à¤¶à¤¨ होने पर कà¥à¤› अलग लकà¥à¤·à¤£ दिख सकते हैं।
किडनी में इंफेकà¥à¤¶à¤¨ होने पर
अपर बैक और साइड में दरà¥à¤¦
तेज बà¥à¤–ार के साथ ठंड लगना
उलà¥à¤Ÿà¥€
घबराहट
बà¥à¤²à¥ˆà¤¡à¤° में इंफेकà¥à¤¶à¤¨ होने पर
पेलà¥à¤µà¤¿à¤• पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤°
लोअर à¤à¤¬à¥à¤¡à¥‰à¤®à¤¨ डिसकंफरà¥à¤Ÿ
फà¥à¤°à¥€à¤•à¥à¤µà¥‡à¤‚ट पेनफà¥à¤² यà¥à¤°à¤¿à¤¨à¥‡à¤¶à¤¨
यूरिन में बà¥à¤²à¤¡ आना
यà¥à¤°à¥‡à¤¥à¥à¤°à¤¾ में इंफेकà¥à¤¶à¤¨ होने पर
यूरिनेशन के साथ बरà¥à¤¨à¤¿à¤‚ग का à¤à¤¹à¤¸à¤¾à¤¸ होना
डिसà¥à¤šà¤¾à¤°à¥à¤œ अधिक मातà¥à¤°à¤¾ में निकलना
किस कारण से होता है पेशाब में संकà¥à¤°à¤®à¤£
पेशाब में संकà¥à¤°à¤®à¤£ मूतà¥à¤° मारà¥à¤— में बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ पहà¥à¤‚च जाने के कारण होता है। मूतà¥à¤° मारà¥à¤— होता हà¥à¤† बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ बà¥à¤²à¥ˆà¤¡à¤° में पहà¥à¤‚च जाता है और फिर अपनी संखà¥à¤¯à¤¾ बढ़ाने लगता है। वैसे तो यूरिनरी सिसà¥à¤Ÿà¤® कà¥à¤› इस तरह से डिजाइन रहता है कि उसमे बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ न जा सके, लेकिन कà¤à¥€-कà¤à¥€ à¤à¤¸à¤¾ पॉसिबल नहीं हो पाता है। पेशाब में संकà¥à¤°à¤®à¤£ के कारण बà¥à¤²à¥ˆà¤¡à¤° और यूरेथà¥à¤°à¤¾ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ होते हैं। वजायना और रेकà¥à¤Ÿà¤® के आसपास अधिक मातà¥à¤°à¤¾ में बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ रहते हैं। बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ मूतà¥à¤°à¤®à¤¾à¤°à¥à¤— से जाते हà¥à¤ मूतà¥à¤°à¤¾à¤¶à¤¯ यानी यूरेथà¥à¤°à¤¾ में à¤à¥€ पहà¥à¤‚च कर समसà¥à¤¯à¤¾ खड़ी करते हैं। अगर सही समय पर इलाज ना कराया जाठतो किडनी में इंफेकà¥à¤¶à¤¨ का पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ पड़ सकता है। महिलाओं में पेशाब में संकà¥à¤°à¤®à¤£ जलà¥à¤¦à¥€ होता है, वहीं पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ में ये कम पाया जाता है। वरà¥à¤²à¥à¤¡ हेलà¥à¤¥ ओरà¥à¤—नइजेशन (WHO) की रिपोरà¥à¤Ÿ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° तकरीबन 50 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ महिलाओं को कà¤à¥€ ना कà¤à¥€ यूरिन इंफेकà¥à¤¶à¤¨ की परेशानी हà¥à¤ˆ है। वहीं, लगà¤à¤— तीन पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ को à¤à¥€ यूटीआई की समसà¥à¤¯à¤¾ होती है।
बà¥à¤²à¥ˆà¤¡à¤° का इंफेकà¥à¤¶à¤¨
ये संकà¥à¤°à¤®à¤£ ई. कोलाई बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ के कारण होती है। ये बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ गैसà¥à¤Ÿà¥‹à¤‡à¤‚टसà¥à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤¨à¤² में पाया जाता है। कà¤à¥€-कà¤à¤¾à¤° अनà¥à¤¯ बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ à¤à¥€ बà¥à¤²à¥ˆà¤¡à¤° में इंफेकà¥à¤¶à¤¨ के लिठजिमà¥à¤®à¥‡à¤¦à¤¾à¤° हो सकते हैं। सेकà¥à¤¸à¥à¤…ल इंटरकोरà¥à¤¸ के दौरान à¤à¥€ सिसà¥à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ हो सकता है। महिलाओं में सिसà¥à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ का खतरा अधिक होता है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि यूरेथà¥à¤°à¤¾ की à¤à¤¨à¤¸ से दूरी कम होती है। इसके अलावा महिलाओं के यूरेथà¥à¤°à¤¾ कि लंबाई à¤à¥€ पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ के मà¥à¤•ाबले कम होती है, यही कारण है कि महिलाओं में पेशाब के संकà¥à¤°à¤®à¤£ के अधिक होने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ रहती है।
यूरेथà¥à¤°à¤¾ का इंफेकà¥à¤¶à¤¨
इस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में GI बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ à¤à¤¨à¤¸ से यूरेथà¥à¤°à¤¾ में फैल जाता है। कई बार ये समसà¥à¤¯à¤¾ सेकà¥à¤¶à¥à¤…ल इंटरकोरà¥à¤¸ के दौरान à¤à¥€ हो सकती है। हारà¥à¤ªà¥€à¤¸ (herpes), गोनोरिया(gonorrhea), कà¥à¤²à¥ˆà¤®à¤¾à¤‡à¤¡à¤¿à¤¯à¤¾(chlamydia) और मायकोपà¥à¤²à¤¾à¤œà¥à¤®à¤¾(mycoplasma) आदि के लकà¥à¤·à¤£ à¤à¥€ दिखाई दे सकते हैं।
बॉडी फैकà¥à¤Ÿà¤°
महिलाओं में à¤à¤• उमà¥à¤° के बाद मोनोपॉज की अवसà¥à¤¥à¤¾ आती है, तब पीरियडà¥à¤¸ आना बंद हो जाते हैं। मोनोपॉज होने पर वजायना की लाइनिंग में चेंज आता है और à¤à¤¸à¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤œà¤¨ की सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ सही रूप से नहीं मिल पाती है। इस कारण से à¤à¥€ पेशाब में संकà¥à¤°à¤®à¤£ की समसà¥à¤¯à¤¾ बढ़ सकती है। कà¥à¤› महिलाओं के यूरीनरी टà¥à¤°à¥‡à¤• की बनावट के कारण à¤à¥€ पेशाब का संकà¥à¤°à¤®à¤£ जलà¥à¤¦à¥€ हो जाने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ रहती है। बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ आसानी से शरीर में पà¥à¤°à¤µà¥‡à¤¶ कर जाते हैं और संकà¥à¤°à¤®à¤£ को फैलाने का काम करते हैं। सेकà¥à¤¶à¥à¤…ली इंटरकोरà¥à¤¸ à¤à¥€ पेशाब के संकà¥à¤°à¤®à¤£ को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करता है।
बरà¥à¤¥ कंटà¥à¤°à¥‹à¤² के कारण
जो महिलाà¤à¤‚ बरà¥à¤¥ कंटà¥à¤°à¥‹à¤² के लिठडायाफà¥à¤°à¤¾à¤® (diaphragms) का उपयोग करती हैं, उनमे अनà¥à¤¯ महिलाओं की तà¥à¤²à¤¨à¤¾ में यूरिन में इंफेकà¥à¤¶à¤¨ होने का खतरा अधिक होता है। जो महिलाà¤à¤‚ सà¥à¤ªà¤°à¤®à¤¿à¤¸à¤¾à¤‡à¤¡à¤² फोम ( spermicidal foam) के साथ कंडोम का यूज करती हैं उनको à¤à¥€ अनà¥à¤¯ महिलाओं की तà¥à¤²à¤¨à¤¾ में यूरिन में इंफेकà¥à¤¶à¤¨ होने का अधिक खतरा होता है।
यूरिन में इंफेकà¥à¤¶à¤¨ के रिसà¥à¤• फैकà¥à¤Ÿà¤° कà¥à¤¯à¤¾ हैं ?
महिलाओं में यूरिन का इंफेकà¥à¤¶à¤¨ होने की अधिक संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ होती है। अगर किसी महिला को à¤à¤• बार यूरिन इंफेकà¥à¤¶à¤¨ हो चà¥à¤•ा है तो à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯ में à¤à¥€ यूरिन इंफेकà¥à¤¶à¤¨ की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ बढ़ सकती है। यूरिन इंफेकà¥à¤¶à¤¨ के साथ कà¥à¤› रिसà¥à¤• फैकà¥à¤Ÿà¤° à¤à¥€ जà¥à¤¡à¤¼à¥‡ हà¥à¤ हैं। जानिठकà¥à¤¯à¤¾ हैं रिसà¥à¤• फैकà¥à¤Ÿà¤°,
महिलाओं की à¤à¤¨à¤¾à¤Ÿà¥‰à¤®à¥€ (Female anatomy)
महिलाओं में पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ की अपेकà¥à¤·à¤¾ छोटा यूरेथà¥à¤°à¤¾ होता है। यहीं कारण है कि महिलाओं के यरेथà¥à¤°à¤¾ के माधà¥à¤¯à¤® से बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ आसानी से बà¥à¤²à¥ˆà¤¡à¤° तक पहà¥à¤‚च जाते हैं।
सेकà¥à¤¶à¥à¤…ल à¤à¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤µà¤¿à¤Ÿà¥€
जो महिलाà¤à¤‚ सेकà¥à¤¶à¥à¤…ली à¤à¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤µ नहीं रहती हैं उनकी अपेकà¥à¤·à¤¾ में सेकà¥à¤¶à¥à¤…ली à¤à¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤µ महिलाओं में यूरिन इंफेकà¥à¤¶à¤¨ का खतरा अधिर बढ़ जाता है। नà¥à¤¯à¥‚ सेकà¥à¤¶à¥à¤…ल पारà¥à¤Ÿà¤¨à¤° यूरिन इंफेकà¥à¤¶à¤¨ के खतरे को बढ़ा सकता है। सेकà¥à¤¸à¥à¤…ल टà¥à¤°à¤¾à¤‚समिटेड इंफेकà¥à¤¶à¤¨ जैसे गोनोरिया और कà¥à¤²à¤¾à¤®à¤¾à¤‡à¤¡à¤¿à¤¯à¤¾ होने पर à¤à¥€ यूटीआई के लकà¥à¤·à¤£ सामने आते हैं। जिसमें पेशाब करने में दरà¥à¤¦, बार-बार पेशाब आना और बà¥à¤²à¥ˆà¤¡à¤° में दरà¥à¤¦ होता है। à¤à¤¸à¥‡ में अगर आप यूरिनरी टà¥à¤°à¥ˆà¤•à¥à¤Ÿ इंफेकà¥à¤¶à¤¨ की जांच की जाती है। जिसका रिजलà¥à¤Ÿ निगेटिव आता है तो आरà¤à¤¨à¤ टेसà¥à¤Ÿ कराया जाता है। जिसके रिपोरà¥à¤Ÿ के आधार पर इलाज किया जाता है।
यूरिनरी टà¥à¤°à¥ˆà¤•à¥à¤Ÿ à¤à¤¬à¥à¤¨à¥‰à¤°à¥à¤®à¤²à¤¿à¤Ÿà¥€à¤œ (Urinary tract abnormalities )
जिन बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के जनà¥à¤® के समय ही यूरिनरी टà¥à¤°à¥ˆà¤•à¥à¤Ÿ à¤à¤¬à¥à¤¨à¥‰à¤°à¥à¤®à¤²à¤¿à¤Ÿà¥€à¤œ पाई जाती हैं, उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ आगे चलकर यूरिन इंफेकà¥à¤¶à¤¨ की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ बढ़ जाती है। पेशाब के सही से बाहर न निकल पाने के कारण वो वापस यà¥à¤°à¥‡à¤¥à¥à¤°à¤¾ में चली जाती है और यूरिन इंफेकà¥à¤¶à¤¨ के चांसेज बढ़ जाते हैं।
यूरीनरी टà¥à¤°à¥ˆà¤•à¥à¤Ÿ में बà¥à¤²à¥‰à¤•ेज के कारण
किडनी सà¥à¤Ÿà¥‹à¤¨ या फिर इंलारà¥à¤œ पà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥à¤Ÿà¥‡à¤Ÿ के कारण यूरिन पास होने में समसà¥à¤¯à¤¾ हो सकती है और बà¥à¤²à¥ˆà¤¡à¤° में पेशाब अधिक समय तक à¤à¤°à¥€ रहती है। इस कारण से à¤à¥€ यूरिन इंफेकà¥à¤¶à¤¨ की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ बढ़ जाती है।
सपà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤¡ इमà¥à¤¯à¥‚न सिसà¥à¤Ÿà¤® के कारण
डायबिटीज और अनà¥à¤¯ बीमारियों के कारण इमà¥à¤¯à¥‚न सिसà¥à¤Ÿà¤® बिगड़ जाता है और शरीर बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ से सही से नहीं लड़ पाता है। इस कारण से à¤à¥€ यूरिन इंफेकà¥à¤¶à¤¨ की समसà¥à¤¯à¤¾ बढ़ सकती है।
कैथेटर का यूज
किसी कारणवश जिन लोगों को कैथेटर का यूज करना पड़ता है, उनमे यूरिन इंफेकà¥à¤¶à¤¨ की समसà¥à¤¯à¤¾ बढ़ जाती है। जब लोग पेशाब करने में असमरà¥à¤¥ होते हैं तो हॉसà¥à¤ªà¤¿à¤Ÿà¤² में कैथेटर यानी à¤à¤• टà¥à¤¯à¥‚ब का यूज किया जाता है, जिसके माधà¥à¤¯à¤® से पेशाब बाहर निकाली जाती है। नà¥à¤¯à¥‚रोलॉजिकल की समसà¥à¤¯à¤¾ से जूठरहे लोग या फिर हॉसà¥à¤ªà¤¿à¤Ÿà¤² में à¤à¤°à¥à¤¤à¥€ लोगों के लिठकैथेटर का यूज किया जाता है।
यूरीनरी पà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€à¤œà¤° के कारण
अगर किसी वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ की यूरीनरी पà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€à¤œà¤° यानी सरà¥à¤œà¤°à¥€ हà¥à¤ˆ है और मेडिकल इंसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥à¤®à¥‡à¤‚ट का यूज किया गया है तो à¤à¤¸à¥‡ लोगों में à¤à¥€ यूरीन इंफेकà¥à¤¶à¤¨ होने का अधिक खतरा रहता है।
पेशाब में संकà¥à¤°à¤®à¤£ के कारण कà¥à¤¯à¤¾ होते हैं कॉमà¥à¤ªà¥à¤²à¥€à¤•ेशन
अगर यूरिन इंफेकà¥à¤¶à¤¨ का सही समय पर इलाज करा लिया जाठतो कॉमà¥à¤ªà¥à¤²à¥€à¤•ेशन की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ नहीं रहती है। लेकिन यूरिन इंफेकà¥à¤¶à¤¨ के लकà¥à¤·à¤£ दिखने के बावजूद à¤à¥€ अगर सही समय पर इलाज नहीं कराया जाता है तो कॉमà¥à¤ªà¥à¤²à¥€à¤•ेशन बढ़ने की पूरी संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ रहती है।
जो महिलाà¤à¤‚ सही समय पर इलाज नहीं करवाती हैं, उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ यूरिन इंफेकà¥à¤¶à¤¨ कई बार होने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ रहती है।
अगर सही समय पर यूरिन इंफेकà¥à¤¶à¤¨ का इलाज नहीं कराया गया तो किडनी डैमेज का खतरा हो सकता है।
जो महिलाà¤à¤‚ पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚ट हैं और यूरिन इंफेकà¥à¤¶à¤¨ से गà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤ हैं, उनमे पà¥à¤°à¥€à¤®à¥‡à¤šà¥à¤¯à¥‹à¤° बेबी डिलिवर करने का अधिर खतरा रहता है। साथ ही बचà¥à¤šà¥‡ का वजन कम होने का खतरा à¤à¥€ रहता है।
सही समय पर इलाज न कराने पर सेपà¥à¤¸à¤¿à¤¸ का खतरा à¤à¥€ रहता है।
पेशाब में संकà¥à¤°à¤®à¤£ का डायगà¥à¤¨à¥‹à¤¸ कैसे किया जाता है ?
अगर आपको पेशाब में जलन महसूस होती है या फिर बार-बार पेशाब लगती है तो तà¥à¤°à¤‚त डॉकà¥à¤Ÿà¤° से संपरà¥à¤• करें। डॉकà¥à¤Ÿà¤° आपसे कà¥à¤› बातें पूछेगा। फिर डॉकà¥à¤Ÿà¤° यूरिन टेसà¥à¤Ÿ के लिठकहेगा। फिर टेसà¥à¤Ÿ के माधà¥à¤¯à¤® से पेशाब में संकà¥à¤°à¤®à¤£ फैलाने वाले बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ के बारे में डॉकà¥à¤Ÿà¤° जांच करेगा। डॉकà¥à¤Ÿà¤° अलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¾à¤‰à¤‚ड के लिठà¤à¥€ कह सकता है। सीटी सà¥à¤•ैन या फिर à¤à¤®à¤†à¤°à¤†à¤ˆ à¤à¥€ किया जा सकता है। डॉकà¥à¤Ÿà¤° जांच के लिठलंबे, फà¥à¤²à¥ˆà¤•à¥à¤¸à¤¿à¤¬à¤² टà¥à¤¯à¥‚ब का à¤à¥€ इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² कर सकता है। इस टà¥à¤¯à¥‚ब को सिसà¥à¤Ÿà¥‹à¤¸à¥à¤•ोप कहते हैं। इसके माधà¥à¤¯à¤® से यूरेथà¥à¤°à¤¾ और बà¥à¤²à¥ˆà¤¡à¤° की जाच की जाती है। इसके अलावा बà¥à¤²à¤¡ टेसà¥à¤Ÿ à¤à¥€ किया जा सकता है।
कैसे किया जाता है पेशाब में संकà¥à¤°à¤®à¤£ का इलाज ?
अगर आपका डॉकà¥à¤Ÿà¤° पेशाब में संकà¥à¤°à¤®à¤£ की जांच कर लेता है तो वो आपको à¤à¤‚टीबायोटिकà¥à¤¸ खाने की सलाह दे सकता है ।इसे कॉमन टà¥à¤°à¥€à¤Ÿà¤®à¥‡à¤‚ट कहा जाता है। डॉकà¥à¤Ÿà¤° ने आपको जितने à¤à¥€ समय के लिठदवा खाने की सलाह दी है, उसे जरूर लें। साथ ही में अधिक मातà¥à¤°à¤¾ में पानी पिà¤à¤‚। जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ पानी पीने से बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ यूरिन के माधà¥à¤¯à¤® से शरीर से बाहर निकल जाà¤à¤—ा। साथ ही डॉकà¥à¤Ÿà¤° आपको दरà¥à¤¦ से राहत दिलाने के लिठमेडिसिन दे सकता है। आप चाहे तो हीटिंग पैड का à¤à¥€ इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² कर सकते हैं। यूरिन इंफेकà¥à¤¶à¤¨ की समसà¥à¤¯à¤¾ से बचने के लिठकà¥à¤°à¥ˆà¤¨à¤¬à¥‡à¤°à¥€ जूस का à¤à¥€ यूज किया जाता है। लाल रंग की बेरी ई कोलाई बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ से रकà¥à¤·à¤¾ करने का काम करता है। लेकिन रिसरà¥à¤š में ये बात सामने नहीं आई है कि बेरी का यूज करने से इंफेकà¥à¤¶à¤¨ से कितनी राहत मिलती है।
कà¥à¤°à¥‹à¤¨à¤¿à¤• यूरिन इंफेकà¥à¤¶à¤¨ की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में
अगर किसी पà¥à¤°à¥à¤· को à¤à¤• बार यूरिन इंफेकà¥à¤¶à¤¨ हà¥à¤† है तो दूसरी बार à¤à¥€ इंफेकà¥à¤¶à¤¨ हो सकता है। ये जरूरी नहीं है कि हर बार à¤à¤• ही बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ से इंफेकà¥à¤¶à¤¨ की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ हो। लेकिन कà¥à¤› बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ शरीर में पà¥à¤°à¤µà¥‡à¤¶ करने के बाद अपनी संखà¥à¤¯à¤¾ बढ़ाते है। फिर ये शरीर की कोशिकाओं में अटैक करते हैं। इस तरह से यूरीनरी टà¥à¤°à¥‡à¤• में फिर से संकà¥à¤°à¤®à¤£ की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ बढ़ जाती है। इससे कà¥à¤°à¥‰à¤¨à¤¿à¤• यूरिन इंफेकà¥à¤¶à¤¨ की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ बढ़ जाती है।
इन बातों का रखें धà¥à¤¯à¤¾à¤¨
अगर आपको यूरिन का à¤à¤¹à¤¸à¤¾à¤¸ हो रहा है तो तà¥à¤°à¤‚त यूरिन पास करें। यूरिन को देर तक रोके रहना इंफेकà¥à¤¶à¤¨ को बढ़ावा देना है।
आपको हाइजीन का à¤à¥€ पूरा खà¥à¤¯à¤¾à¤² रखना होगा। पीरियडà¥à¤¸ के दौरान लंबे समय तक à¤à¤• ही पैड न लगाà¤à¤‚ रखें। जब चार से पांच घंटे में या फिर पैड हैवी लगने में चेंज करती रहे।
ये बात धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखें कि सफाई रखने से बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ नहीं पनपते हैं। अगर आप गंदा टॉयलेट यूज कर रही हैं तो संकà¥à¤°à¤®à¤£ फैलने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ बढ़ जाà¤à¤—ी।
पानी और तरल पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ को अधिक मातà¥à¤°à¤¾ में लें। à¤à¤¸à¤¾ करने से बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ यूरिन के माधà¥à¤¯à¤® से बाहर निकल जाà¤à¤‚गे।
वजाइना के आसपास सफाई का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखें। वजाइना के पास गीलापन रहने से à¤à¥€ समसà¥à¤¯à¤¾ बढ़ सकती है।
अगर आपको à¤à¥€ यूरिन में इंफेकà¥à¤¶à¤¨ के लकà¥à¤·à¤£ नजर आ रहे हैं तो बेहतर रहेगा कि à¤à¤• बार अपने डॉकà¥à¤Ÿà¤° से संपरà¥à¤• करें। सही समय पर इलाज कॉमà¥à¤ªà¥à¤²à¥€à¤•ेशन से बचाने का काम करता है।
खाने में फल और सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का सेवन करते समय जिनमें विटामिन-सी यà¥à¤•à¥à¤¤ फल और सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ जरूर शामिल करें। खाने में नींबू, आंवला, संतरा आदि शामिल करें। विटामिन-सी बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ से लड़ने में मदद करता है।
शरीर के लिठकॉटन के कपड़ें को सही माना गया है। पेशाब के संकà¥à¤°à¤®à¤£ से बचने के लिठपà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤µà¥‡à¤Ÿ पारà¥à¤Ÿ की सफाई रखने के साथ ही कॉटन के अंडरगारमेंटà¥à¤¸ का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करें। साथ ही अंडरगारमेंटà¥à¤¸ को रोजाना धà¥à¤² कर ही पहने।
सेकà¥à¤¸ के तà¥à¤°à¤‚त बाद पेशाब करें।
टाइट पैंटी और जीनà¥à¤¸ न पहनें।
पà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤µà¥‡à¤Ÿ पारà¥à¤Ÿ में कॉसà¥à¤®à¥‡à¤Ÿà¤¿à¤• का यूज सही नहीं होता है। गà¥à¤ªà¥à¤¤à¤¾à¤‚गो पर अगर आप à¤à¤¸à¤¾ कà¥à¤› इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² कर रही हैं तो तà¥à¤°à¤‚त à¤à¤• बार डॉकà¥à¤Ÿà¤° से à¤à¥€ पूछ लें।
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